Sanskrit Grammar

श्चुत्व संधि /Shchutva Sandhi

श्चुत्व संधि व्यञ्जन संधि का एक प्रकार है। व्यञ्जन संधि अर्थात व्यञ्जन वर्ण का स्वर या व्यञ्जन के साथ मेल। सूत्र..”स्तोः श्चुनाश्चुः “ यदि प्रथम पद के अन्त में सकार – ‘स’ या तवर्ग के बाद मे शकार -‘श ‘ या चवर्ग आये तो स को श तथा तवर्ग को चवर्ग हो जाता है। अर्थात […]

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अकारान्त पुलिङ्ग शब्द रूप.

अकारान्त पुलिङ्ग शब्द रूप…के अन्तर्गत राम बालक नर वृक्ष आदि के रूप आते हैं। जिन शब्दों के अन्त में अ होता है,उन्हें अकारान्त पुलिङ्ग शब्द कहते हैं।जैसे.बालक, राम, नर, वृक्ष, आदि। ये सारे शब्द एक निश्चित नियम के अनुसार चलते हैं। प्रायः प्रथमा व द्वितीया विभक्ति के द्विवचन व बहुवचन के रूप एक जैसे होते

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रमा लता शब्द रूप.

रमा लता शब्द रूप तथा बालिका विद्याअजा आदि शब्द आकारान्त होते हैं, क्योंकि इनके अन्त में आ होता है। ये सारे रूप एक निश्चित नियम के अनुसार चलते हैं। प्रायः प्रथमा व द्वितिया विभक्ति के द्वि वचन व बहु वचन के रूप एक जैसेहोते हैं। तृतीया चतुर्थी व पंचमी के द्वि वचन एक जैसे होते

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णिनि-इनि प्रत्यय

युक्त / वाला अर्थ में संज्ञा शब्दों के साथ णिनि-इनि प्रत्यय का प्रयोग होता है। जैसे ज्ञान + णिनि >इन् = ज्ञानी अर्थात ज्ञान से युक्त/वाला । फल + णिनि >इन् = फली अर्थात फल से युक्त/ फल वाला। णिनि/इनि प्रत्यय भी मतुप् प्रत्यय की भांति प्रयुक्त होता है। यह कर्तृ वाच्य मे प्रयुक्त होता

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ठक् प्रत्यय /Thak Pratyay

ठक् प्रत्यय एक तद्धित प्रत्यय है। यह प्रत्यय संज्ञा शब्दों के साथ प्रयुक्त होता है। तस्य इदं, ततः आगतः , तस्य निवासः , तत्र भावः अर्थात.. उसका यह , उससे आया हुआ, उसमें विद्यमान या उसका भाव आदि, इस प्रकार का भाव देता है। *ठक् प्रत्यय का प्रयोग ‘संबन्धी ‘ अर्थ में भाववाचक संज्ञा बनाने

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Matup Pratyay/ मतुप् प्रत्यय

मतुप् प्रत्यय एक तद्धित प्रत्यय है.. जो ‘युक्त‘ अर्थ में या वाला अर्थ में संज्ञा व सर्वनाम शब्द के साथ प्रयोग किया जाता है। जैसे… सःबलवान् अस्ति। वह बलवान है अर्थात बल से युक्त है। हिन्दी भाषा में जो अर्थ वान, वाला, वाली आदि प्रत्ययों से प्रकट होता है, वही अर्थ मतुप् प्रत्यय से प्रकट

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अनीयर् प्रत्यय.परिचय/Aniyar Pratyaya

अनीयर् प्रत्यय वर्तमान कालिक प्रत्यय है।इस प्रत्यय का प्रयोग योग्यता अर्थ में तथा चहिए अर्थ में होता है। जैसे… योग्यता अर्थ में…. उसका कार्य प्रशंसनीय है ..अर्थात प्रशंसा के योग्य है। चहिए अर्थ में … तुम्हें पढ़ना चाहिए। इस प्रत्यय का प्रयोग प्रायः सभी धातुओं के साथ हो सकता है। इसका प्रयोग भी तव्यत प्रत्यय

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तव्यत प्रत्यय…परिचय तथा प्रयोग के नियम ..

तव्यत प्रत्यय का प्रयोग विधिलिङ्ग् लकार के अर्थ में होता है।तथा इसका प्रयोग कर्म वाच्य में होता है। चहिये के अर्थ में धातुओं का प्रयोग करने के लिये तव्यत् प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है। इसका अर्थ संभावना अनुमति आदि होता है। कर्म वाच्य तथा भाव वाच्य में इसका प्रयोग होता है। कर्तृ वाच्य में

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द्वन्द्व समास परिभाषा तथाभेद…

द्वन्द्व समास सूत्र..उभयपदप्रधानः द्वन्द्वः द्वन्द्व समास..परिभाषा…जिस समास में दोनों पद समान रूप से प्रधान होते हैं, उसे द्वन्द्व समास कहते हैं। इस समास में अव्ययीभाव और तत्पुरुष की तरह पहला या दूसरा पद प्रधान नहीं होता है। इसके अन्तर्गत च या और से जुड़े हुए दो या दो से अधिक संज्ञाओं का समास होता है।

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बहुब्रीहि समास परिभाषा तथा भेद

जिस समास में आए हुए दो पदों में से कोई भी पद प्रधान न हो और उनसे बना हुआ सामासिक पद अपने पद से भिन्न किसी अन्य संज्ञा का विशेषण होता है , उसे बहुब्रीहि समास कहते हैं। बहुब्रीहि समास में सामासिक पद को छोड़ कर कोई अन्य पद ही प्रधान होता है। अर्थात ये

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