Sanskrit Ke Upsarga संस्कृत के उपसर्ग

Sanskrit Ke Upsarga …. परिचय …उपसर्ग शब्द, दो शब्दों के योग से बना है…. उप +सर्ग। उप शब्द का अर्थ है समीप , निकट या पास तथा सर्ग का अर्थ है सृष्टि करना, निर्माण करना। अतः उपसर्ग का अर्थ है, किसी शब्द के पास बैठ कर एक नये अर्थ वाले शब्द बनाना। उपसर्ग की परिभाषा….. […]

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अस्मद् युष्मद् शब्द रूप Asmad Yushmad Shabd Roop

Asmad Yushmad Shabd Roop अस्मद् युष्मद् शब्द रूप… ये सर्वनाम शब्द के अन्तर्गत आते हैं ।अस्मद् का रूप में अहम् = मैं ,आवाम् =हम दोनों ,वयम् =हम सब इस प्रकार के रूप बनाते हैं।इसी प्रकार अन्य विभक्तियों में भी रूप बनता है। युष्मद् शब्द त्वम्= तुम के विभिन्न रूपों के लिये है…त्वम् =तुम , युवाम्

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Ukarant Puling Shabd Roop भानु गुरु साधु पशु

Ukarant Puling Shabd Roop.. जिन शब्दों के अन्त में ‘उ’ होता है , उन्हें उकारान्त शब्द कहते हैं। जैसे…भानु, गुरु, पशु, शत्रु, रिपु, साधु, वायु आदि उकारान्त शब्द हैं। भानु शब्द रूप विभक्ति एकवचन द्विवचन बहुवचन प्रथमा भानुः भानू भानवः द्वितीया भानुम् भानू भानून् तृतीया भानुना भानुभ्याम् भानुभिः चतुर्थी भानवे भानुभ्याम् भानुभ्यः पञ्चमी भानोः भानुभ्याम्

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इकारान्त पुलिङ्ग शब्द रूप

इकारान्त पुलिङ्ग शब्द रूप… जिन पुलिङ्ग वाचक शब्दों के अंत में ह्रस्व इ होता है, वे इकारान्त पुलिङ्ग शब्द कहे जाते हैं। ये शब्द रूप एक निश्चित नियम के अनुसार चलते हैं।प्रायः प्रथमा व द्वितीया विभक्ति के द्विवचन के रूप एक जैसे होते हैं। तृतीया चतुर्थी व पञ्चमी के द्वि वचन एक जैसे होते हैं।चतुर्थी

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पुनरुक्त शब्द

पुनरक्ति/द्विरुक्ति पुनरुक्त शब्द अर्थात पुनः कहे गये शब्द। इसे पुनरक्ति/द्विरुक्ति भी कहते हैं। पुनरक्ति या द्विरुक्ति का अर्थ है दुहराना। जब हम बात चीत करते हैं, या कुछ लिखते हैं तो कुछ शब्दों को दो बार उच्चारित करते हैं.. जैसे..आईये-आईये .. गरम-गरम चाय पीजिये। इसे ही पुनरुक्त शब्द कहते हैं। पुनरक्त शब्द पुनः +उक्त से

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कारण क्या है..

न्याय दर्शन के अनुसार कारण क्या है.. तर्क संग्रह के अनुसार कारण क्या है? साधारण भाषा में कहें तो कारण अर्थात.. हेतु या वजह। जैसे…आप किस कारण से जा रहे हैं? आप क्यों यहां आये हैं… वस्तुतः..कोई भी कार्य बिना कारण के नहीं हो सकता है । प्रत्येक कार्य के लिए कोई न कोई कारण

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पदार्थ क्या है..

तर्क संग्रह के अनुसार पदार्थ क्या है.. न्याय वैशेषिक के अनुसार पदार्थ क्या है..कौन- कौन से पदार्थ हैं?…वस्तुतः द्रव्य गुण कर्म आदि विषय, जिनका विवेचन इस ग्रन्थ में किया गया है, इन्हें ही पदार्थ कहा गया है। न्याय वैशेषिक में तत्व के स्थान पर पदार्थ का प्रयोग किया गया है। पदार्थ का लक्षण है..” पदजन्यप्रतीतिविषयत्वं

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षड् वेदाङ्ग परिचय..

षड् वेदाङ्ग परिचय…वेदाङ्ग क्या हैं… ..वेदाङ्ग का अर्थ है ‘वेदस्य अङ्गानि’ … अर्थात वेद का अङ्ग। वेदों के वास्तविक अर्थ के ज्ञान के लिये जिन साधनों की आवश्यकता होती है, उन्हें वेदाङ्ग कहते हैं। अङ्ग क्या हैं…. अङ्ग्यन्ते ज्ञायन्ते एभिरिति अङ्गानि….जिसके द्वारा किसी वस्तु या व्यक्ति के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है उसे,

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Sanskrit Me Lakar संस्कृत में लकार.

Sanskrit Me Lakar..संस्कृत में लकार का प्रयोग काल के लिये होता है। ये संख्या में दस (10) हैं। लट्, लृट्, लोट् , लङ्ग, विधिलिङ्ग,लिट्, लुट्, लिङ्ग, लुङ्ग लृङ्ग । इन सबका नाम ‘ल’ से है अतः इन्हें लकार कहा जाता है।इन लकारों का क्रियाओं से अत्यन्त निकट संबन्ध होता है। ये विभिन्न कालों के वाचक

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इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द रूप..

मति गति बुद्धि शब्द रूप इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द रूप अर्थात जिन स्त्रीलिंग वाचक शब्दों के अंत में ह्रस्व इ होता है, वे इकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द कहे जाते हैं.. ये शब्द रूप एक निश्चित नियम के अनुसार चलते हैं। प्रायः प्रथमा व द्वितीया विभक्ति के द्विवचन व बहुवचन के रूप एक जैसे होते हैं। तृतीया चतुर्थी

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