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कारण क्या है..

न्याय दर्शन के अनुसार कारण क्या है.. तर्क संग्रह के अनुसार कारण क्या है? साधारण भाषा में कहें तो कारण अर्थात.. हेतु या वजह। जैसे…आप किस कारण से जा रहे हैं? आप क्यों यहां आये हैं… वस्तुतः..कोई भी कार्य बिना कारण के नहीं हो सकता है । प्रत्येक कार्य के लिए कोई न कोई कारण […]

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पदार्थ क्या है..

तर्क संग्रह के अनुसार पदार्थ क्या है.. न्याय वैशेषिक के अनुसार पदार्थ क्या है..कौन- कौन से पदार्थ हैं?…वस्तुतः द्रव्य गुण कर्म आदि विषय, जिनका विवेचन इस ग्रन्थ में किया गया है, इन्हें ही पदार्थ कहा गया है। न्याय वैशेषिक में तत्व के स्थान पर पदार्थ का प्रयोग किया गया है। पदार्थ का लक्षण है..” पदजन्यप्रतीतिविषयत्वं

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षड् वेदाङ्ग परिचय..

षड् वेदाङ्ग परिचय…वेदाङ्ग क्या हैं… ..वेदाङ्ग का अर्थ है ‘वेदस्य अङ्गानि’ … अर्थात वेद का अङ्ग। वेदों के वास्तविक अर्थ के ज्ञान के लिये जिन साधनों की आवश्यकता होती है, उन्हें वेदाङ्ग कहते हैं। अङ्ग क्या हैं…. अङ्ग्यन्ते ज्ञायन्ते एभिरिति अङ्गानि….जिसके द्वारा किसी वस्तु या व्यक्ति के स्वरूप को समझने में सहायता मिलती है उसे,

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Guna SandhiGuna Sandhi ke Niyam, Sutra aur 40+ Examples | Sanskrit

सूत्र..आद् गुणः गुण संधि स्वर संधि का एक प्रकार है। गुण संधि का सूत्र..आद् गुणः है। परिभाषा /परिचय अ या आ वर्ण के बाद यदि इ, ई, उ, ऊ, ऋ, लृ में से कोई वर्ण आए, तो दोनो के स्थान पर क्रमशः.. ए, ओ,अर्, अल् हो जाता है। इसे ही गुण संधि कहते हैं। अर्थात

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पञ्चीकरण प्रक्रिया क्या है..

Vedant Ke Anusar Panchi Karan Prakriya वेदान्त दर्शन में पञ्चीकरण प्रक्रिया स्थूल सृष्टि के निर्माण की एक विशिष्ट प्रक्रिया है।सृष्टि के विकास हेतु पञ्च तन्मात्राओं को परस्पर मिलाने की प्रक्रिया ,पञ्चीकरण प्रक्रिया कही जाती है। पञ्च तन्मात्राओं में प्रत्येक का गुण प्रत्येक में मिलाने की प्रक्रिया से सूक्ष्म पदार्थ स्थूल रूप में परिवर्तित हो जाते

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सूक्ष्म शरीर /लिङ्ग शरीर..

वेदांतसार के अनुसार सूक्ष्म शरीर /लिङ्ग शरीर .. सूक्ष्म शरीर /लिङ्ग शरीर क्या है? वेदान्त के अनुसार..सूक्ष्म शरीर ही लिङ्ग शरीर कहा जाता है। इनके द्वारा ही शुद्ध चैतन्य आत्मा का ज्ञान होता है। इस लिङ्ग शरीर के सत्रह( 17) अवयव बताये गये हैं। इस सूक्ष्म शरीर के द्वारा जीवात्मा के अस्तित्व का बोध होता

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अध्यारोप क्या है..

वेदांतसार के अनुसार अध्यारोप क्या है.. अध्यारोप क्या है ..अद्वैत वेदान्त के अनुसार जीव और ब्रह्म एक हैं , उनका ऐक्य प्रतिपादन ही इस ग्रन्थ का विषय है। ब्रह्म के यथार्थ स्वरूप का ज्ञान कराना अद्वैत वेदान्त का लक्ष्य है,परंतु भ्रम वश हम इसमें भेद समझ लेते हैं। वेदांत में अध्यारोप क्या है.. “जो वस्तु

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वेदान्तसार केअनुसार.अज्ञान क्या है..

वेदान्त सार के अनुसार अज्ञान किसे कहते हैं.. वेदान्त में अज्ञान को अविद्या या माया के रूप में जाना जाता है। अज्ञान से अभिप्राय ज्ञान का अभाव नहीं है। अज्ञान न तो सत् है, न ही असत् है बल्कि यह सत् और असत् के बीच का है, अनिर्वचनीय है। अज्ञानम् तु सदसद्भ्यामनिर्वचनीयम् त्रिगुणात्मकं ज्ञानविरोधीभावरूपं यत्किञ्चिदिति

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अनुबन्ध चतुष्टय.. वेदान्त सार के अनुसार..

Anubandh Chatushtaya अनुबन्ध चतुष्टय क्या हैं…सुसंबद्ध तथा विचार करने योग्य तत्वों को अनुबन्ध कहते हैं। जब भी कोई ग्रन्थ लिखा या पढ़ा जाता है तो यह विचार उठता है कि इस ग्रन्थ को पढ़ने का अधिकारी कौन है? इस ग्रन्थ द्वारा प्रतिपाद्य विषय क्या है? विषय और उस शास्त्र में संबन्ध क्या है? तथा उस

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वर्णों का उच्चारण स्थान/varno ka uchcharan sthan

वर्णों का उच्चारण स्थान किसे कहते हैं? कहां कहां से वर्णों का उच्चारण करते हैं.. वर्णों का उच्चारण स्थान किसे कहते हैं? कहां कहां से वर्णों का उच्चारण करते हैं… इस आर्टिकल में हम ये जानेंगे… मुख का वह भाग जिनका प्रयोग करके वर्णों का उच्चारण करते हैं, जिह्वा, मुख के जिन भागों का स्पर्श

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