क्तवतु-प्रत्यय का अर्थ/ktvatu pratyay ka arth…
क्तवतु प्रत्यय भी एक भूत कालिक कृदन्त प्रत्यय है।यह प्रत्यय केवल कर्तृ वाच्य में प्रयोग किया जाता है। नोट…कर्तृ वाच्य में कर्ता में प्रथमा और कर्म (यदि हो तो) में द्वितीया होती है। *क्रिया के लिंग और वचन कर्ता के लिंग और वचन के अनुसार होते हैं। जैसे.. १.बालकः हसितवान्। लड़का हंसा। २.बालकौ हसित्वन्तौ। दो […]