Sanskrit Ke Upsarga संस्कृत के उपसर्ग

Sanskrit Ke Upsarga …. परिचय …उपसर्ग शब्द, दो शब्दों के योग से बना है…. उप +सर्ग। उप शब्द का अर्थ है समीप , निकट या पास तथा सर्ग का अर्थ है सृष्टि करना, निर्माण करना। अतः उपसर्ग का अर्थ है, किसी शब्द के पास बैठ कर एक नये अर्थ वाले शब्द बनाना।

उपसर्ग की परिभाषा…..

ऐसे शब्दांश,जो किसी शब्द के आदि में आकर उसके अर्थ में विशेषता उत्पन्न कर देते हैं या सर्वथा ही इसके अर्थ को बदल देते हैं, वे उपसर्ग कहे जाते हैं। जैसे- ‘हार’ से पहले ‘प्र, आ, वि, सम् परि’ उपसर्ग लगाने से क्रमशः ‘प्रहार, आहार, संहार, विहार और परिहार बनते हैं जो अर्थ में बिल्कुल ही भिन्न-भिन्न है। इसके संदर्भ में एक श्लोक भी कहा गया है-

उपसर्गेण धात्वयों बलादन्यत्र नीयते। प्रहाराहार संहार विहारपरिहारवत् ॥
अर्थात…उपसर्ग के द्वारा धातु का अर्थ बलपूर्वक अन्यत्र ले जाया जाता है, अर्थात् बदल दिया जाता है है। जैसे-प्रहार, आहार, संहार, विहार और परिहार।

उपसर्ग भी अव्यय की श्रेणी में आते हैं। उए संख्या में 22 हैं। ये उपसर्ग धातु या धातु से बने हुए विशेषण, संज्ञा आदि शब्दों के पूर्व जोड़े जाते हैं, इस कारण इन्हें उपसर्ग कहते हैं। जिन शब्दों के पूर्व ये जुड़ते हैं उन शब्दों या धातुओं का अर्थ परिवर्तित हो जाता है, इनके द्वारा धातु के विभिन्न अर्थों का प्रकाश होता है, जैसे.. कृ धातु का अर्थ है.. “करना “ परन्तु इसके पूर्व विभिन्न उपसर्ग लगाने से तिरस्कार , अनुकार, अधिकार आदि शब्द बना जाता है। इसी प्रकार अन्य शब्द में भी बनते हैं …

  • भाव से.. प्रभाव , अभाव , निर्भाव, निष्प्रभाव, स्वभाव, प्रतिभाव, समभाव , सद्भाव
  • कर्म से.. सत्कर्म, दुष्कर्म, सुकर्म, कुकर्म
  • ज्ञान से… विज्ञान , प्रज्ञान, अज्ञान, संज्ञान,
  • गति से… प्रगति, सद्गति , दुर्गति , अधोगति
  • मान से … सम्मान, अपमान, अभिमान, अनुमान, विमान, प्रतिमान,

उपसर्ग के बारे में ध्यान देने योग्य बातें…

  1. उपसर्ग संख्या में 22 हैं।
  2. ये अव्यय की श्रेणी में आते हैं।
  3. ये शब्द के आदि में लग कर शब्द के अर्थ में विशेषता ला देते है या उसके अर्थ को बदल देते हैं।
  4. उपसर्ग से बने हुए शब्द यौगिक शब्द की श्रेणी में आते हैं।
  5. उपसर्गों का प्रयोग स्वतन्त्र रूप से प्रयोग नहीं हो सकता है, क्योंकि जब तक ये किसी शब्द के साथ प्रयुक्त नहीं होते तब तक ये अर्थवान नहीं होते।

उपसर्ग उनके अर्थ तथा उदाहरण…

उपसर्गउपसर्ग क अर्थउदाहरण
प्रअधिक, प्रकर्षप्रख्यात, प्रहार, प्रसार, प्रमाण, प्रलय
परानिषेध, विरोध, अति उच्चतापराजय, पराकाष्ठा, पराक्रम, पराभव
अपहीनता, न्यूनता, बुरा,अपयश, अपमान, अपकार, अपवाद, अपशब्द, अपशकुन
सम्अच्छासंसर्ग, संपर्क, संकल्प, संसार,
अनुपीछे, समानअनुशासनम्, अनुचर, अनुकरणम्, अनुजः अनुरूपम्, अनुकूलम् ।
अवहीनता /निम्नताअवलोकनम्, अवगुण, अवनतिः, अवज्ञा ।
निस्निषेध,निश्शंकः, निष्काम,
निर्बिना, रहितनिर्दोषः,निरपराधः, निर्भयः निर्गुण
दुष्कठिनदुष्करं, दुष्कर्मः दुष्शासन
दुर्बुरादुर्जनः, दुर्गुणः, दुर्लभः, दुर्व्यवहार
विविभिन्न, विशिष्ट,
विज्ञानम्ः, विदेशः, विवादः विषाद
आङ्ग, आपर्यन्त, तक , कमआमरणम्, आजन्म, आरम्भः, आसमुद्रम् ।
निविरोध, निषेध , नीच निवारणम्, निरोधः, निदानम् ।
नियोगः, निपातः, निबन्धः ।
अधिअधिकार, ऊपर , श्रेष्ठ
अधिराजः, अधिकृतिः, अधिपतिः, अध्यक्षः
अतिअधिक अति या उल्लङ्घनअतिरिक्तम्, अतिनिर्धनः, अतिक्रमणम्, अत्यन्तम् ।
सुअच्छासुकविः सुकर्म, सुकृतम्, सुभगम्, सुदूरम् ।
उत्ऊपर, ऊँचाउत्तमः, उत्पत्तिः, उत्कर्षः, उन्नतिः ।
अभिचारो ओर , सामनेअभियोगः, अभिज्ञानम्, अभिनयः, अभिमानम् ।
अभिमुखम् ।
प्रतिविरुद्ध , सामने , हर एकप्रतिध्वनिः, प्रतिकूलम्, प्रतिनिधि, प्रतिवादी
प्रत्यक्षम् ।
परिआस-पास, चारो ओरपरिधिः ५रितुष्टः, परितापः, परिजनः, परिचयः
उपसमीप , अमुख्य, छोटाउपकारः, उपदेशः, उपकूलम्, उपगङ्गम्, उपनयनम्,
उपनगरम्. उपक्रमम्, उपन्यासः ।
उपनाम, उपमन्त्री, उपाचार्य, उपासना ।
उपवनम्, उपचारः, उपहारः, उपभेदः ।
अपिनिकटअपिधानम्

Sanskrit Ke Upsarga

👉संस्कृत के उपसर्ग और उदाहरण

  • प्र…. प्रख्यातम्, प्रहारः, प्रसारः, प्रमाणम्, प्रलयम्, प्रकाश ।
  • परा…पराजयः, पराक्रमः, पराभवःपराकाष्ठा ।
  • अप..अपशब्दः, अपशकुनम्, अपयशः, अपकारः, अपवादः, अपकर्णः।
  • सम..संसर्गः, सम्पर्कः, सकल्पः, संसारः ।
  • अनु…अनुशासनम्, अनुचर, अनुकरणम्, अनुजः,अनुरूपम्, अनुकूलम् ।
  • अव…अवलोकनम्, अवगुण, अवनतिः, अवज्ञा, अवमानना ।
  • निस्…. निष्पाप, निष्कलङ्क, निष्काम, निश्चिन्त, निस्सन्देह,
  • निर्….निर्दोषः, निश्शंकः, निरपराधः, निर्भयः, निर्णयः, निराकारः, निर्लज्जः ।
  • दुष्….दुश्शासनम्, दुष्करः, दुष्कर्मः दुस्तरः।
  • दुर्…दुर्जनः,, दुर्लभः, दुर्गुणः,, दुराचारः, दुर्गम ।
  • वि….विज्ञानम्ः, विदेशः, विवादः विनयः, विशारदः, वितनोति, विशेषः ।विनाशः, विमला, विधवा, वियोगः ।
  • आङ्ग (आ )..आमरणम्, आजन्म, आरम्भः, आसमुद्रम् आदानम्
  • नि…निवारणम्, निरोधः, निदानम् ,नियोगः, निपातः, निबन्धः ।
  • अधि…अधिराजः, अधिकृतिः, अधिपतिः, अध्यक्षः अधिकार, अधिवेशनम्, अध्यादेशः
  • अति…अतिरिक्तम्, अतिनिर्धनः, अतिक्रमणम्, अत्यन्तम् ।
  • सु…सुकविः सुकर्म, सुकृतम्, सुभगम्, सुदूरम्, सुस्वागतम् ।
  • उत्…उत्तमः, उत्पत्तिः, उत्कर्षः, उन्नतिः, उत्थानम्, उत्सुकः उच्चारणः।
  • अभि…अभियोगः, अभिज्ञानम्, अभिनयः, अभिमानम् अभिमुखम् ।
  • प्रति…प्रतिध्वनिः, प्रतिकूलम्, प्रतिनिधि, प्रतिवादी प्रत्यक्षम् , प्रतिदिनम्, प्रतिवर्षम्,प्रतिमासम् प्रत्यक्षरम्, प्रतिपक्षम्
  • परि.. परिधिः परितुष्टः, परितापः, परिजनः, परिचयः ।
  • उप…उपनगरम्, उपक्रमम्, उपन्यासः,उपनाम, उपमन्त्री, उपाचार्य, उपासना,उपकारः, उपदेशः, उपकूलम् उपगङ्गम्, उपनयनम्, उपवनम्, उपचारः, उपहारः, उपभेदः ।

👉नोट…कुछ शब्द एक से अधिक उपसगों के योग से भी बनते हैं। जैसे व्यवहारः =वि + अव+हारः । समन्वयः = सम +अनु +अयः। दुर्व्यवहारः= दुर्+ वि+अव+ हारः, व्याकरण = वि +आ =करण, निरनुनासिक =निर् +अनु+नासिक, समालोचना =सम् +आ +लोचना , परोपकार =पर +उप +कार

👉उपर्युक्त प्र आदि उपसर्गों के अतिरिक्त कुछ अव्ययों तथा विशेषणों का भी प्रयोग उपसगों की भांति होता है। जैसे-

शब्द.अर्थउदाहरण
अन्तःअन्दरअन्तःपुरम्, अन्तर्जालम्
सत्अच्छासज्जनः, सत्पात्रम् ।
कुबुराकुमार्गः, कुपुत्रः
अधस्नीचेअधःपतन
चिरम्बहुत देरचिरन्तन
नञनहींअनन्त
पुनर्फिरपुनर्निर्माण
बहिर्बाहरबहिष्कार
पुरस्सामनेपुरस्कार
पुरापहलेपुरातन
सहसाथसहचर, सहपाठी
स्वअपनास्वदेश , स्वकर्म
नमस्प्रणामनमस्कार , नमस्तुभ्यम्
अलम्बसअलंकृत ,
सहितसचित्र, सहित

विशेष – (१) कुछ उपसर्गों का प्रयोग स्वतन्त्र रीति से (अलग) होता है। जैसे १- जपम् अनु प्रावर्षत् (जप के बाद वर्षा हुई)
(२) ये उपसर्ग अव्यय के ही अन्तर्गत आते हैं।

Sanskrit Ke Upsarga

कुछ उपसर्गों का धातु के साथ प्रयोग

छात्रों के ज्ञान के लिए नीचे कुछ सोपसर्ग धातुए दी जाती हैं। अनुवाद करते समय इन क्रियाओं का अच्छा उपयोग हो सकता है।

  1. भू- होना
  • भवति= होता है।
  • अनुभवति =अनुभव करता है।
  • अभिभवति =दबता है, तिरस्कार करता है।
  • पराभवति= पराभव करता है।
  • परिभवति =तिरस्कार करता है।
  • उद्‌द्मवति =उत्पन्न होता है।
  • उपतिष्ठते= उपस्थान करता है, निकट बैठता है।
  • आविर्भवति = प्रकट होता है।
  • प्रादुर्भवति =उत्पन्न होता है।
  • तिरोभवति =छिपता है।
  • सम्भवति =हो सकता है, उत्पन्न होता है।

2..नी = ले जाना ।

  • नयति = ले जाता है।
  • विनयति = विनय करता है।
  • विनयते = गिनता है या खर्च करता है ।
  • अनुनयति = मनाता है।
  • परिणयति = विवाह करता है।
  • निर्णयति = निर्णय करता है ।
  • अभिनयति अभिनय करता है ।
  • उपनयति = पास ले जाता है।
  • अपनयति = दूर करता है।
  • आनयति = लाता है।
  • प्रणयति = प्रेम करता है ।

3..वद् = बोलना

  • बदति = बोलता है ।
  • प्रतिवदति= जवाब देता है।
  • संवदति= बात करता है।
  • संप्रवदते = मिलकर बोलता है।
  • अनवदति =बुरा भला कहता है, गाली देता है।
  • अनुवदति= अनुवाद करता है।
  • उपबदति=प्राथना करता है।
  • विवदते =झगड़ा करता

4…स्था ठहरना, रुकना ।

  • तिष्ठति – ठहरता है, बैठता है।
  • प्रतिष्ठते – प्रस्थान करता है।
  • उपतिष्ठते = उपस्थान करता है, निकट बैठता है।
  • उत्तिष्ठति= उठता है।

5..कृ= करना ।

  • करोति करता है।
  • विकुरुते= उच्चारण करता है ।
  • विकुर्वति = विकार प्राप्त करता है।
  • तिरस्करोति – तिरस्कार करता है।
  • संस्करोति – संस्कार करता है।
  • अपाकरोति = खण्डन करता है, घटाता है दूर करता है।
  • प्रत्युपकरोति = प्रत्युपकार करता है।
  • प्रकुरुते = जबरदस्ती करता है।
  • उत्कुरुते = चुगली करता है।
  • उपकरोति – उपकार करता है।
  • अनुकरोति = नकल करता है।

6..चर् = घूमना ।

  • चरति = घूमता है या खाता है।
  • विचरति – विचरण करता है।
  • अच्चरते = उल्लंघन करता है।
  • उच्चरति= ऊपर जाता है।
  • आचरति =आचरण करता है।
  • उपचरित = उपचार करता है।
  • अनुचरित – अनुसरण करता है।
  • संचरते – भ्रमण करता है।
  • अपचरति =विपरीत चलता है।
  • व्यभिचरति =व्यभिचार करता है।
  • परिचरति – सेवा करता है।
  • उच्चरति = ऊपर जाता है।
  • आचरति = आचरण करता है।
  • उपचरति= उपचार करता है।
  • अनुचरति =अनुसरण करता है।
  • संचरते = भ्रमण करता है।

6..हृ= ले जाना अथवा चुराना ।

  • हरति =ले जाता है।
  • अपहरति – चुराता है।
  • परिहरति = छोड़ता है।
  • आहरति = लाता है।
  • व्याहरति =बोलता है।
  • व्यवहरति = व्यवहार करता है।
  • प्रहरति = मारता है।
  • विहरति- विहार करता है।
  • उपहरति = उपहार देता है।
  • उपाहरति – लाता है।
  • उदाहरति = उदाहरण देता है।
  • समाहरति – इकट्ठा करता है।
  • प्रत्युदाहरित = दूसरा उदाहरण देता है।
  • उद्धरति – निकलता है, उद्धार करता है।
  • अनुहरति – नकल करता है।

Sanskrit Ke Upasarg

उपसर्ग + धातु : प्रयोग एवं अर्थ

7..गम् = जाना ।

  • गच्छति = जाता है।
  • आगच्छति – आता है।
  • अवगच्छति – समझता है, जानता है।
  • निर्गच्छति =निकलता है।
  • अधिगच्छति =प्राप्त करता है।
  • प्रतिगच्छति = लौटता है।
  • उद्गच्छति =ऊपर जाता है।
  • अपगच्छति= दूर हटता है।

8..क्षिप – फेंकना ।

  • क्षिपति = फेंकता है।
  • निक्षिपति – नीचे फेंकता है।
  • आक्षिपति= दोष लगाता है।
  • उतक्षिपति = ऊपर फेंकता है।
  • विक्षिपति = विक्षिप्त होता है।

9..सृ – सरकना ।

  • सरति – सरकता है।
  • अनुसरति =अनुवरण करता है।
  • प्रसरति= फैलता है।
  • अवसरति =निकलता है।
  • अपसरति =हटता है।

10..ईक्ष =देखना

  • वीक्षते =देखता है।
  • ईक्षते =देखता है।
  • प्रतीक्षते = प्रतीक्षा करता है।
  • समीक्षते – विमर्श करता है।
  • अन्वीक्षते =चिन्तन करता है या मनन करता है।
  • उपेक्षते =लापरवाही करता है।
  • अपेक्षते =अपेक्षाकरता है।

10…लप् बोलना ।

  • लपति – बोलता है।
  • विलपति – विलाप करता है।
  • प्रलपति – बकवास करता है।
  • आलपति – बोलता है, आलाप करता है।
  • संलपति – वार्तालाप करता है।
  • अपलपति = छिपाता है।

11…पत् = गिरना ।

  • पतति = गिरता है।
  • प्रणिपतति =प्रणाम करता है।
  • निपतति =गिरता है।
  • उत्पतति= उड़ता है।
  • प्रपतति= गिरता है।

12..रुह – जमना

  • रोहति = उगता है।
  • प्ररोहति – उत्पन्न होता है।
  • अधिरोहति – चढ़ता है।
  • अवरोहति = उतरता है।
  • आरोहति चढ़ता है।
  • संरोहति = मिलता है।

13..आप् = पाना।

  • आप्नोति= प्राप्त करता है।
  • व्याप्नोति= व्याप्त करता है।
  • समाप्नोति = समाप्त करता है या होता है।
  • प्राप्नोति = पाता है।

14..आस् – बैठना ।

  • आस्ते = बैठता है।
  • उदास्ते = उदासीन होता है।
  • उपास्ते =उपासना करता है।
  • अध्यास्ते= रहता है।
  • अन्वास्ते= पीछे बैठता है।

15.. तृ-तैरना ।

  • तरति = तैरता है।
  • अवतरित उतरा हुआ ।
  • वितरति देता है।
  • उत्तरित जवाब देता है, पार जाता है।
  • संतरति = तैरता है।

16… क्रमां= पैर चलाना।

  • क्रामत = चलता है।
  • क्रमते= उत्साह करता है।
  • उपक्रमते= आरम्भ करता है।
  • विक्रमते =आगे बढ़ता है।
  • निष्क्रामति= निकलता है।
  • आक्रामति =ऊपर जाता है।
  • अपक्रमित = हटता है।

Sanskrit Ke Upsarga

17..अस – फेंकना ।

  • अस्यति फेंकता है।
  • अपास्यति = दूर करता है।

18… पद् = चलना, जाना ।

  • पद्यते – जाता है ।
  • संपद्यते = सुखी होता है, सम्पन्न होता है
  • उत्पद्यते = पैदा होता है ।
  • विपद्यते = मरता है।
  • आपद्यते = आफत में पड़ता है।
  • प्रपद्यते =शरण में आ जाता है।
  • प्रतिपद्यते= आज्ञा माँगता है।

19…. धा= धारण करना, पोषण करना ।

  • दधाति= धारण करता है।
  • विदधाति= विधान करता है।
  • अन्तर्धते= छिपता है।
  • संधत्ते= मेल करता है।
  • पिधत्ते = ढाँकता है।
  • परिधत्ते = पहिनता है।
  • आधत्ते = स्थापित करता है।
  • निधत्ते = रखता है।
  • प्रणिधत्ते= ध्यान करता है ।
  • प्रतिनिधत्ते =प्रतिनिधित्व करता है।

20… एति = जाता है।

  • प्रत्येति =विश्वास करता है।
  • अन्येति= नष्ट होता है।
  • अन्वेति – पीछे मिलता है।
  • विपर्येति =उल्टा समझता है।

21.. गृह – लेना ।

  • गृह्णाति= लेता है।
  • अनुगृह्णाति= कृपा करता है।
  • आगृह्णाति = पकड़ता है।
  • दुरागृह्णाति = हठ करता है।
  • प्रतिगृह्न ति = दान लेता है।
  • निगृह्णाति = कैद करता है।

22… चि = चुनना

  • चिनोति = चुनता है।
  • परिचिनोति = पहचानता है।
  • निचिनोति =इकट्ठा करता है।
  • उपचिनोति =बढ़ता है।
  • सचिनोति=इकट्ठा करता है।
  • अवचिनोति= इकट्ठा करता है।

23… ज्ञा = जानना

  • जानाति – जानता है।
  • जानीते= प्रवृत्त होता है।
  • अपजानीते = छिपाता है।
  • प्रतिजानीते = प्रतिज्ञा करता है।
  • अनुजानाति =अनुमति देता है।
  • उपजानाति = आरम्भ करता है।
  • अवजानाति = अपमान करता है ।

24.. सद् = ठहरना, वुखी होना ।

  • सीदति – ठहरता है, दुःखी होता है ।
  • प्रसीदति – प्रसन्न होता है।
  • विषीदति = खिन्न होता है।
  • अवसीदति = थकता है।
  • उपासीदति- पास बैठता है।

25… बन्ध् = बाँधना ।

  • बध्नाति = बाँधता है।
  • प्रवध्नाति = प्रबन्ध करता है।
  • निबध्नाति = निबन्ध लिखता है।
  • प्रतिबध्नाति = रोक लगाता है।
  • उदबध्‌नाति = फाँसी लगाता है।
  • नबंधनाति = प्रेम करता है।

संस्कृत के उपसर्ग Sanskrit Ke Upsarga

अव्यय किसे कहते हैं... के लिये इसे पढ़िये…

Sanskrit Ke Upasarga

उपसर्ग पर आधारित प्रश्न उत्तर…

1…निम्नलिखित शब्दों से उपसर्ग और मूल धातु अलग करिये…

  1. उत्तिष्ठति
  2. निरगच्छत्
  3. निस्सरतु
  4. संवदन्ति
  5. प्रत्यवदत्
  6. सुशोभते
  7. प्रभवति
  8. अनुकरोति
  9. प्रासीदत
  10. अवागच्छः
  11. उपविशामि
  12. उत्थापयामि
  13. उन्नयति –
  14. अपाकुर्व
  15. विजयते
  16. परितुष्यति

2…कोष्ठकात् शुद्धपदानि चित्वा रिक्तस्थानेषु लिखत-(कोष्ठक से शुद्ध पद चुन कर रिक्त स्थानों पर लिखिये..)

  1. हे प्रभो! मयि…….। (प्रासीदतु / प्रसीदत्)
  2. गुरुः शिष्यस्य अज्ञानम्……..। (उपहरति / अपहरति)
  3. वानराः जनान्……….। (अनुकुर्वन्ति / अन्वकुर्वन्ति)
  4. अहं संस्कृतम्……..। (अवजानामि / अवाजानामि)
  5. सत्यम् एव वदनीयम्……..। (आजीवनम् / आजीवनः)
  6. अध्यापकः प्रश्नान् पृच्छति। छात्राः………। (प्रतिवदन्ति संवदन्ति)
  7. कामात् क्रोधः……..। (पराभवति / उद्भवति)
  8. सभायां विद्वांसः एव………। (सुशोभन्ते / सुशोभन्ति)
  9. चौरः रात्रौ धनम्……..। (व्यहरत् / अहरत)
  10. माता पुत्रः च परस्परम्……..। (प्रतिवदतः संवदतः)
  11. गुरुः आश्रमात्………। (प्रविशति / निर्गच्छति)
  12. नागरिकाः एव स्वदेशम्…..। (उद्रयन्ति / उन्नयन्ति)
  13. वयं चलच्चित्रं द्रष्टुम् अत्र……। (अवागच्छाम / आगच्छाम)
  14. माता पुत्रम्……..। (संस्करोति / समकरोति)
  15. नदी पर्वतात्……। (प्रवहति / उद्भवति)

उत्तर…

प्रश्न न. 1

  1. उत्तिष्ठति… उत् +स्था
  2. निरगच्छत्…. निर् + गम्
  3. निस्सरतु… निर् +सृ
  4. संवदन्ति….. सम् +वद्
  5. प्रत्यवदत्…. प्रति +वद्
  6. सुशोभते…. सु +शुभ
  7. प्रभवति…. प्र +भू
  8. अनुकरोति….. अनु +कृ
  9. प्रासीदत…… प्र +सीद्
  10. अवागच्छः… अव+गम्
  11. उपविशामि…. उप +विश्
  12. उत्थापयामि…… उत् +स्था
  13. उन्नयति –…. उत् +नी
  14. अपाकुर्व….. अप +कृ
  15. विजयते… वि +जि
  16. परितुष्यति… परि + तुष्

उत्तर.. प्रश्न 2…

प्रसीदतु 2..अपहरति , 3..अनुकुर्वन्ति , 4..अवजानामि , 5..आजीवनम् , 6..प्रतिवदन्ति , 7..उद्भवति , 8..सुशोभन्ते , 9..अहरत् , 10..सम्वदतः , 11..निर्गच्छति,, 12..उन्नयन्ति , 13..आगच्छाम, 14..संस्करोति , 15..उद्भवति।

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